
पुढवी आऊतेऊवणप्फदितसेसु जदि वि साहरिदो ।
वोसट्ठचत्तदेशे अधाउगं पालए तत्थ॥2073॥
कोई उन्हें भू जल आदिक या त्रस जीवों में देवें फेंक ।
तन ममत्व तज आयु पूर्ण होने तक वहीं पड़े रहते॥2073॥
अन्वयार्थ : यदि कोई दुष्ट खींचकर पृथ्वी में, जल में, अग्नि में, वनस्पति में, त्रसों/जहाँ त्रस जीव हों, वहाँ पटक दे तो वहाँ ही स्थित रहते हैं, देह का ममत्व छोड दिया है जिनने, ऐसे क्षपक वहाँ ही मरणपर्यंत अवस्थित रहकर आयु को वहीं पूर्ण करते हैं ।
सदासुखदासजी