
मज्जणयगंधपुप्फीवयारपडिचारणे पि कीरंते ।
वोसट्टचत्तदेहो अधाउगं पालए तधवि॥2074॥
यदि कोई अभिषेक करे या गन्ध पुष्प से भी पूजे ।
तन ममत्व तज रोष-तोष नहिं करते उसे नहीं रोकें॥2074॥
अन्वयार्थ : यदि कोई आकर अभिषेक करे या सुगंधित पुष्पादि से पूजा, स्तवन करे तो भी त्याग दिया है देह से ममत्व जिनने, ऐसे क्षपक रागी-द्वेषी नहीं होते, आयुपर्यंत वैसी ही अवस्था में आयु पूर्ण करते हैं ।
सदासुखदासजी