+ मन-वचन योग में रहकर बादरकाययोग को सूक्ष्म करते हैं और सूक्ष्मकाययोग में रहकर मन- -
सुहमाए लेस्साए सुहमकिरियबंधगो तणो ताधे ।
काइयजोगे सुहुमम्मि सुहमकिरियं जिणा झादि॥2126॥
सूक्ष्म लेश्या सहित क्रिया से शुभ1 वेदनी प्रकृति बाँधें ।
वर्ते सूक्षम काय योग में तीजा शुक्ल ध्यान ध्यावें॥2126॥
अन्वयार्थ : सूक्ष्मलेश्या से सूक्ष्मक्रियारूप परिणमित जिन (जिनेन्द्र) सूक्ष्मकाययोग में तिष्ठ कर सूक्ष्मक्रिया ध्यान को ध्याते हैं ।

  सदासुखदासजी