+ दान के बिना गृहस्थाश्रम जलांजली देने योग्य -
पूजा न चेज्जिनपतेः पद-पंकजेषु,
दानं न संयतजनाय च भक्तिपूर्व् ।
नो दीयते किमु ततः सदनस्थितायाः,
शीघ्रं जलांजलिरगाधजले प्रविश्य॥24॥
जहाँ नहीं जिनपूजा होती, भक्तिभाव से दान नहीं ।
तो गहरे जल में प्रवेश कर, उस घर को क्यों तजें नहीं?॥
अन्वयार्थ : जिस गृहस्थाश्रम में जिनेन्द्र भगवान के चरण-कमलों की पूजा नहीं होती तथा भक्तिभाव से संयमीजनों के लिए दान भी नहीं दिया जाता; उस गृहस्थाश्रम को अत्यन्त गहरे जल में प्रवेश कराके जल की अंजलि देना चाहिए ।