+ अपने धन के अनुसार दान देने का उपदेश -
ग्रासस्तदर्ध पि देयमथाऽर्धमेव,
तस्यापि सन्ततमणुव्रतिना यथर्द्धि ।
इच्छानुरूपमिह कस्य कदात्र लोके,
द्रव्यं भविष्यति सदुत्तमदानहेतुः॥32॥
एक ग्रास या आधा या, चौथाई देवें अणुव्रती ।
उत्तम दान हेतु इच्छा-अनुसार मिला धन किसे कभी?॥
अन्वयार्थ : श्रावक को अपने धन के अनुसार एक ग्रास अथवा आधा ग्रास अथवा चौथाई ग्रास अवश्य ही दान देना चाहिए क्योंकि इस संसार में उत्तम पात्रदान का कारण इच्छानुसार द्रव्य कब और किसके होगा?