+ पात्रदान के प्रभाव से सर्व अनुकूलताओं की प्राप्ति -
सौभाग्यशौर्यसुखरूप-विवेकिताद्या,
विद्यावपुर्धनगृहाणि कुले च जन्म ।
सम्पद्यतेऽखिलमिदं किल पात्रदानात्;
तस्मात्किमत्रसततंक्रियतेनयत्नः॥44॥
भाग्य-शौर्य सुख-रूप-ज्ञान-तन-विद्या-धन-कुल हो उत्तम ।
पात्र-दान से ही मिलते हैं, अत: दान का करो प्रयत्न॥
अन्वयार्थ : सौभाग्य, शूरता, सुख, विवेक आदि तथा विद्या, शरीर, धन, घर और उत्तम कुल में जन्म - ये सब बातें उत्तमादि पात्रदान से ही होतीे हैं; इसलिए भव्य जीवों को सदा पात्रदान में ही प्रयत्न करना चाहिए ।