+ जिन-मन्दिर अथवा जीर्णोद्धार हेतु दान का महत्त्व -
यद्दीयते जिनगृहाय धरादि किंचित्,
तत्तत्र संस्कृतिनिमित्तमिह प्ररूढम् ।
आस्ते ततस्तदतिदीर्घतरं हि कालं,
जैनञ्च शासनमत: कृतमस्ति दातु: ॥51॥
जिन-मन्दिर के लिए भूमि का दान करे संस्कृति रक्षा ।
जिन-शासन चिरजीवी दाता ने जिनमत उद्धार किया ॥
अन्वयार्थ : जो जिन-मन्दिर बनाने के लिए अथवा सुधारने के लिए जमीन, धन आदि दिए जाते हैं, उनसे जिन-मन्दिर अच्छा बनता है, उस जिन-मन्दिर के प्रभाव से बहुत काल तक जिनेन्द्र का मत, इस पृथ्वी-मण्डल पर विराजमान रहता है । इसलिए दाता ने जिन-मन्दिर के लिए जमीन, धन आदि देकर जैनमत का उद्धार किया - ऐसा समझना चाहिए ।