
आयुः क्षतिः प्रतिक्षण-मेतन्मुखमन्तकस्य तत्र गताः ।
सर्वे जनाः किमेकः, शोचयत्यन्यं मृतं मूढः॥28॥
आयु-क्षीण होने पर प्रतिक्षण, आते सब यम के मुख में ।
एक यही अज्ञानी क्यों, प्रिय के वियोग में शोक करे॥
अन्वयार्थ : प्रतिसमय आयु का नाश होता है और वह आयु का नाश ही यमराज का मुख है और उसमें अनेक जीव प्रविष्ट हो चुके हैं । फिर भी यह अज्ञानी जीव, अपने प्रिय के मरने पर न मालूम क्यों शोक करता है?