+ मृत्यु होने पर किसका शोक करना उचित? -
(अनुष्टुभ्)
यो नात्र गोचरं मृत्यो:, गतो याति न यास्यति ।
स हि शोकं मृते कुर्वन्, शोभते नेतरः पुान्॥29॥
जो न कभी भी मरा, मर रहा, और मरेगा कभी नहीं ।
शोक उसी को शोभा देता, अन्य पुरुष को कभी नहीं॥
अन्वयार्थ : जो प्राणी, कभी भी स्वयं न तो मरा है, न मर रहा है और न मरेगा; यदि वह अपने प्रिय के मरने पर शोक करे तो उसका शोक उचित है, किन्तु जो स्वयं अनन्त बार तो मर चुका है, मर रहा है और अनन्त ही बार मरेगा; यदि वह शोक करे तो उसका शोक करना व्यर्थ है । अत: विद्वानों को अपने प्रिय स्त्री-पुत्रादि के मरने पर कदापि शोक नहीं करना चाहिए ।