
आकाश एव शशिसूर्यरुत्खगाद्या:;
भूपृष्ट एव शकटप्रमुखाश्चरन्ति ।
मीनादयश्च जल एव यमस्तु याति;
सर्वत्र कुत्र भविनां भवति प्रयत्नः॥31॥
रवि-शशि-वायु-पक्षी नभ में, वाहनादि भू पर चलते ।
जल में जलचर, यम सर्वत्र, कहाँ बचने का यत्न करें॥
अन्वयार्थ : चन्द्र, सूर्य, पवन, पक्षी आदि तो आकाश में ही चलते हैं; गाड़ी, सिंह, व्याघ्र आदि जमीन पर ही चलते हैं और मछली-मगर आदि जल में ही चलते है; परन्तु यह काल सब जगहों पर चलता है अर्थात् यह काल, प्राणियों को पृथ्वी, जल, आकाश, अग्नि आदि किसी स्थान पर नहीं छोड़ता, फिर इससे बचने का प्रयत्न किया जाए तो कहाँ किया जाए?