+ कौन, किससे अधिक बलवान? -
गीर्वाणा अणिमादिस्वस्थमनसः, शक्ता: किमत्रोच्यते;
ध्वस्तास्तेऽपि परम्परेण स पर:, तेभ्यः कियान् राक्षस: ।
रामाख्येन च मानुषेण निहत:, प्रोल्लंघ्य सोप्यम्बुधिं;
रामोऽप्यन्तकगोचर: समभवत्, कोऽन्यो बलीयान्विधे:॥33॥
अणिमादिक ऋद्धि से भूषित, सब प्रकार बलयुक्त प्रवर ।
उनसे भी अति तुच्छ शत्रु रावण से पीड़ित हुए अमर॥
वह रावण भी सिन्धु पार कर आए मनुज राम से मृत ।
यम गोचर फिर हुए राम भी, विधि से अधिक कौन बलयुत?॥
अन्वयार्थ : विशेष कहाँ तक कहा जाए? जैसे, लोक में कहा जाता है कि जो देव, अणिमा-महिमा आदि ॠद्धि के धारी थे तथा सब प्रकार से समर्थ थे; उनको भी उस रावण नामक राक्षस ने विध्वंस कर दिया, जबकि वह रावण, उन देवों के सामने कुछ चीज न था । उस रावण को भी समुद्र पार कर, राम नामक मनुष्य ने मार दिया तथा पश्चात् वह राम भी कालबली का ग्रास बन गया; इसलिए आचार्य कहते हैं कि कर्म से बलवान् संसार में कोई भी नहीं ।