
तत्प्रति प्रीतिचित्तेन, येन वार्ताऽपि हि श्रुता ।
निश्चितं स भवेद्भव्यो, भाविनिर्वाणभाजनम् ॥23॥
इस आत्मा की बात को भी प्रीति से जिसने सुना ।
वह भव्य है निश्चित अहो! अतिशीघ्र मुक्ति पाएगा॥
अन्वयार्थ : जिस मनुष्य ने प्रसन्नचित्त से चैतन्यस्वरूप आत्मा की बात भी सुनी है; वह भव्य पुरुष, निकट भविष्य में मुक्ति का निश्चय से पात्र होता है अर्थात् वह नियम से मोक्ष जाता है ।