
किं मे करिष्यतः क्रूरौ, शुभाऽशुभनिशाचरौ ।
रागद्वेषपरित्याग,-महामन्त्रेण कीलितौ ॥28॥
क्रूर जो शुभ-अशुभ राक्षस, क्या हमारा कर सकें? ।
वीतरागी मन्त्र से, उनको किया कीलित अरे !
अन्वयार्थ : राग-द्वेष के परित्यागरूपी प्रबल मन्त्र से कीलित तथा क्रूर - ऐसे शुभ तथा अशुभ कर्मरूप राक्षस मेरा क्या करेंगे? अर्थात् वे मेरा कुछ भी बिगाड़ नहीं कर सकते ।