+ आत्मा से भिन्न उदय, उदीरणा, सत्ता आदि कर्मों की रचना -
उदयोदीरणा सत्ता, प्रबन्धः खलु कर्मणः ।
बोधाऽत्मधाम सर्वेभ्य:, तदेवैकं परं परम् ॥34॥
कर्मकृत है बन्ध सत्ता, उदय और उदीरणा ।
किन्तु इनसे भिन्न है, उत्कृष्ट चेतन आत्मा॥
अन्वयार्थ : उदय, उदीरणा, बन्ध, सत्ता इत्यादि समस्त कर्मों की ही रचना है, किन्तुआत्मा समस्त रचना से भिन्न है, उत्कृष्ट है तथा केवलज्ञान का धारी है ।