
नामाऽपि हि परं तस्मान्निश्चयात्तदनामकम् ।
जन्ममृत्यादि चाशेषं, वपुर्धर्ं विदुर्बुधाः ॥36॥
आत्मा इस नाम से भी आत्मा तो भिन्न है ।
जन्म-मरणादिक सभी तन-धर्म है यह बुध कहें॥
अन्वयार्थ : निश्चयनय से आत्मा का कोई नाम नहीं है, वह नाम रहित ही है और जो ये जन्म-मरण आदि धर्म हैं, वे शरीर के ही धर्म हैं - ऐसा बड़े-बड़े विद्वान् कहते हैं ।