+ संसार का सबसे मनोहर और उत्कृष्ट पदार्थ है चैतन्यस्वरूप आत्मा -
तदेवैकं परं रत्नं, सर्वशास्त्रमहोदधेः ।
रमणीयेषु सर्वेषु, तदेकं पुरत: स्थितम् ॥43॥
यह एक सर्वोत्तम रतन है, सर्व शास्त्र-समुद्र का ।
रमणीय सर्व पदार्थ में यह, एक आत्मा ही कहा॥
अन्वयार्थ : समस्त शास्त्ररूपी विस्तीर्ण समुद्र का उत्कृष्ट रत्न, यह चैतन्यस्वरूप आत्मा ही है अर्थात् इसी रत्न की प्राप्ति के लिए शास्त्रों का अध्ययन किया जाता है । संसार में जितने भी मनोहर पदार्थ हैं, उन सब पदार्थों में सबसे मनोहर तथा उत्कृष्ट पदार्थ चैतन्यस्वरूप आत्मा ही है; इसलिये भव्य जीवों को इस चैतन्यस्वरूप आत्मा का ही अच्छी तरह से ध्यान करना चाहिए ।