
साम्यं स्वास्थ्यं समाधिश्च, योगश्चेतोनिरोधनम् ।
शुद्धोपयोग इत्येते, भवन्त्येकार्थवाचका: ॥64॥
साम्य स्वास्थ्य समाधि चित्त-निरोध एवं योग हैं ।
शुद्धोपयोगादि सभी एकार्थवाची शब्द हैं॥
साम्य, स्वास्थ्य, समाधि, योग, चित्त का निरोध, शुद्धोपयोग - ये सभी शब्द
अन्वयार्थ : एक ही अर्थ के कहने वाले हैं अर्थात् इन शब्दों के नाम जुदेह्नजुदे हैं, किन्तु अर्थ एक ही है । अब, आगे साम्य के स्वरूप का वर्णन आचार्यवर करते हैं ।