
मानुष्यं सत्कुले जन्म, लक्ष्मीर्बुद्धिः कृतज्ञता ।
विवेकेन विना सर्वं, सदप्येतन्न किंचन ॥72॥
नर-जन्म उत्तम कुल तथा, श्री बुद्धि और कृतज्ञता ।
सब हों तथापि विवेक बिन, निष्फल जिनेश्वर ने कहा॥
अन्वयार्थ : जो मनुष्य, विवेकी नहीं हैं; उनका मनुष्यपना, उत्तम कुल में जन्म, धन, ज्ञान, कृतज्ञपना आदि भी निष्फल ही हैं; इसलिए मनुष्यों को विवेकी अवश्य होना चाहिए ।