+ विवेकी पुरुष का कर्तव्य -
हेयं हि कर्म रागादि, तत्कार्यं च विवेकिनः ।
उपादेयं परंज्योति,-रुपयोगैकलक्षणम् ॥75॥
ज्ञानियों को कर्मकृत, रागादि तजना चाहिए ।
उपयोग लक्षण परम-ज्योति, मात्र लखना चाहिए॥
अन्वयार्थ : विवेकी पुरुष को ज्ञानावरणादि कर्म तथा उनके कार्यभूत रागादिकों का अवश्य ही त्याग कर देना चाहिए और ज्ञानह्नदर्शनस्वरूप इस उत्कृष्ट आत्म तेज को ही ग्रहण करना चाहिए ।