+ श्रावक के षट् आवश्यक कर्तव्य -
देवपूजा गुरूपास्तिः, स्वाध्यायः संयमस्तपः ।
दानं चेति गृहस्थानां, षट्कर्माणि दिने दिने ॥7॥
देव-पूजा गुरु-सेवा, पठन संयम दान तप ।
छह कर्म श्रावक के लिए, कर्त्तव्य जो प्रतिदिन कहे॥
अन्वयार्थ : जिनेन्द्र देव की पूजा, निर्ग्रन्थ गुरुओं की सेवा, स्वाध्याय, संयम, योग्यतानुसार तप और दान - ये छह कर्म, श्रावकों को प्रतिदिन करने योग्य हैं ।