+ सामायिक व्रत का स्वरूप -
समता सर्वभूतेषु, संयमे शुभभावना ।
आर्तरौद्रपरित्याग:,तद्धि सामायिकं व्रतम् ॥8॥
समभाव हो सब जीव में, शुभ-भावना संयम प्रति ।
आर्त-रौद्र कुध्यान तजना, यही सामायिक कहें॥
अन्वयार्थ : समस्त प्राणियों में साम्यभाव रखना, संयम धारण करने में अच्छी भावना रखना, आर्तध्यान तथा रौद्रध्यान का त्याग करना; इसी का नाम सामायिक व्रत है ।