
सप्तैव नरकाणि स्यु:, तैरेकैकं निरूपितम् ।
आकर्षयन्नृणामेतद्, व्यसनं स्वसमृद्धये ॥12॥
नरक भी हैं सात, उनने समृद्धि के लिए ।
एक नरक के साथ एक, व्यसन हैं निश्चित किए॥
अन्वयार्थ : जिस प्रकार व्यसन सात हैं, उसी प्रकार नरक भी सात ही हैं; इसलिए ऐसा मालूम होता है कि उन नरकों ने अपनी-अपनी समृद्धि के लिए अर्थात् मनुष्यों को खींच कर नरक में ले जाने के लिए एकह्नएक व्यसन को नियत किया है ।