
धर्मशत्रुविनाशार्थं, पापाऽख्यकुपतेरिह ।
सप्ताङ्गबलवद्राज्यं, सप्तभिर्व्यसनैः कृतम् ॥13॥
धर्म-राज विनाश हेतु दुष्ट अघ-नृप ने अरे !
राज्य की सप्तांग सेना, रची सातों व्यसन से॥
अन्वयार्थ : धर्मरूपी वैरी का नाश करने के लिए पाप नामक दुष्ट राजा का सप्त व्यसनों से रचा हुआ 'सात अंगों वाला' बलवान् राज्य है ।