
ये जिनेन्द्रं न पश्यन्ति, पूजयन्ति स्तुवन्ति न ।
निष्फलं जीवितं तेषां, धिक् च गृहाश्रमम् ॥15॥
जिनदेव-दर्शन-स्तवन-पूजन नहीं जो जन करें ।
धिक्कार उनका गृहस्थाश्रम, और धिक् निष्फल जनम॥
अन्वयार्थ : जो मनुष्य, जिनेन्द्र भगवान को भक्ति से नहीं देखते हैं और न उनकी भक्तिपूर्वक पूजाह्नस्तुति ही करते हैं; उन मनुष्यों का जीवन, संसार में निष्फल हैं तथा उनके गृहस्थाश्रम को भी धिक्कार है ।