
ये गुरुं नैव मन्यन्ते, तदुपास्तिं न कुर्वते ।
अन्धकारो भवेत्तेषा,-मुदितेऽपि दिवाकरे ॥19॥
मानते नहिं जो गुरु को, नहिं करें आराधना ।
सूर्य का, हो उदय पर, उनके लिए तो अँधेरा॥
अन्वयार्थ : जो मनुष्य, गुरुओं को नहीं मानते हैं और उनकी सेवा-वन्दना नहीं करते हैं, उन मनुष्यों के लिए सूर्य का उदय होने पर भी अन्धकार ही है ।