
देशव्रताऽनुसारेण संयमोऽपि निषेव्यते ।
गृहस्थैर्येन तेनैव, जायते फलवद्व्रतम् ॥22॥
देशव्रत-अनुसार संयम, भी सदा पालन करो ।
क्योंकि इससे ही श्रावक व्रत, सुनिश्चित अरु सफल हों॥
अन्वयार्थ : धर्मात्मा श्रावकों को एकदेशव्रत के अनुसार, संयम भी अवश्य पालना चाहिए, जिससे उनका लिया हुआ व्रत, फलीभूत हो ।