
त्याज्यं मांसं च मद्यं च, मधूदुम्बरपञ्चकम् ।
अष्टौ मूलगुणाः प्रोक्ताः, गृहिणो दृष्टिपूर्वकाः ॥23॥
मांस-मद्य-मधु उदम्बर-पाँच तजने योग्य हैं ।
ये मूलगुण हैं आठ, सम्यग्दर्श-पूर्वक धारिए॥
अन्वयार्थ : श्रावकों को मद्य-मांस-मधु तथा पाँच उदुम्बर फलों का अवश्य त्याग कर देना चाहिए और सम्यग्दर्शन सहित इन आठ का त्याग ही गृहस्थों के आठ मूलगुण हैं ।