+ विद्वान लोग, व्रतों के बिना एक क्षण भी नहीं -
भोगोपभोगसंख्यानं, विधेयं विधिवत्सदा ।
व्रतशून्या न कर्तव्या, काचित्कालकला बुधैः ॥27॥
भोग अरु उपभोग में, परिमाण-व्रत श्रावक धरें ।
एक क्षण भी बिना व्रत के, कभी नहिं बुधजन रहें॥
अन्वयार्थ : विद्वान् श्रावकों को भोगोपभोगपरिमाणव्रत का सदैव पालन करना चाहिए और एक क्षण भी बिना व्रत के नहीं रहना चाहिए ।