+ विनय की महिमा -
दर्शनज्ञानचारित्र,-तप: प्रभृति सिद्धयति ।
विनयेनेति तं तेन, मोक्षद्वारं प्रचक्षते ॥30॥
दृष्टि-ज्ञान-चारित्र एवं, तपादिक भी प्राप्त हों ।
विनय से ही इसलिए यह, मोक्ष-द्वार सुधी कहें॥
अन्वयार्थ : विनय से ही सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान, सम्यक्चारित्र तथा तप आदि की प्राप्ति होती है; अत: भव्य जीवों को इनकी विनय अवश्य करनी चाहिए ।