+ दया ही समस्त गुणों का आधार -
सर्वे जीवदयाधारा, गुणास्तिष्ठन्ति मानुषे ।
सूत्रधाराः प्रसूनानां, हाराणां च सरा इव ॥39॥
पुष्प-हारों की लड़ी ज्यों, सूत्र के आश्रित रहे ।
त्यों ही पुरुष के गुण सभी, प्राणी-दया आधार से॥
अन्वयार्थ : जिस प्रकार फूलों के हारों की लड़ी, सूत्र के आश्रय से रहती है, उसी प्रकार मनुष्य में समस्त गुण, जीव-दया के आधार से रहते हैं; इसलिए समस्त गुणों की स्थिति के अभिलाषी भव्य जीवों को यह दया अवश्य करनी चाहिए ।