
यत्सुखं तत्सुखाभासं, यद्दुःखं तत्सदाञ्जसा ।
भवे लोकाः सुखं सत्यं, मोक्ष एव ससाध्यताम् ॥47॥
सुख लगे जो सुख नहीं वह, दु:ख लगे वह दु:ख सही ।
वास्तविक सुख मोक्ष में है, साध्य जग को सुख वही॥
अन्वयार्थ : हे जीव! संसार में जो सुख मालूम होता है, वह सुख नहीं - सुखाभास है अर्थात् सुख के समान मालूम पड़ता है और जो दुःख है सो सत्य है क्योंकि वास्तविक सुख मोक्ष में ही है, इसलिए तुझे मोक्ष की प्राप्ति का ही प्रयत्न करना चाहिए ।