+ लोक भावना -
लोकः सर्वोऽपि सर्वत्र, साऽपायस्थितिरध्रुवः ।
दुःखकारीति कर्तव्या, मोक्ष एव मतिः सताम् ॥54॥
इस लोक में सब वस्तु क्षणभंगुर विनश्वर जिन कहें ।
बहुभाँति दु:खदायक अत:, बुध मोक्ष में नित मति धरें॥
अन्वयार्थ : यह समस्त लोक, विनाशीक और अनित्य है तथा नाना प्रकार के दु:खों को करने वाला है - ऐसा विचार कर, उत्तम पुरुषों को सदा मोक्ष की ओर ही बुद्धि लगाना चाहिए ।