+ बोधिदुर्लभ भावना -
रत्नत्रयपरिप्राप्ति:, बोधि: साऽतीव दुर्लभा ।
लब्धा कथं कथंचिच्चेत्, कार्याे यत्नो महानिह ॥55॥
रत्नत्रय की प्राप्ति ही है, बोधि जो दुर्लभ कही ।
प्राप्त हो वह जिस विधि से, यत्न से रक्षा करो॥
अन्वयार्थ : सम्यग्दर्शन-सम्यग्ज्ञान-सम्यक्चारित्ररूप रत्नत्रय की प्राप्ति का नाम बोधि है; इस बोधि की प्राप्ति संसार में अत्यन्त कठिन है । यदि किसी रीति से उसकी प्राप्ति हो भी जाए तो उसकी रक्षा के लिए विद्वानों को प्रबल प्रयत्न करना चाहिए ।