
अन्तस्तत्त्वं विशुद्धात्मा, बहिस्तत्त्वं दयाङ्गिषु ।
द्वयो: सम्मीलने मोक्ष:, तस्माद् द्वितयमाश्रयेत् ॥60॥
शुद्धात्म अन्तस्तत्त्व है, बहिस्तत्त्व है प्राणी-दया ।
इनके मिलन से मोक्ष होता, अत: द्वय अवधारिया॥
अन्वयार्थ : चिदानन्द चैतन्यस्वरूप आत्मा तो अन्तःतत्त्व है तथा समस्त प्राणियों की दया, बाह्यतत्त्व है और इन दोनों तत्त्वों के मिलने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है; इसलिए मोक्षाभिलाषी भव्य जीवों को इन दोनों तत्त्वों का भलीभाँति आश्रय करना चाहिए ।