+ भूतकाल के महापुरुषों में भी दान की विशेषता -
पुत्रे राज्यमशेषमर्थिषु धनं, दत्त्वाऽभयं प्राणिषु;
प्राप्ता नित्यसुखाऽऽस्पदं सुतपसा, मोक्षं पुरा पार्थिवा: ।
मोक्षस्याऽपि भवेत्तत: प्रथमतो, दानं निदानं बुधै:;
शक्त्या देयमिदं सदाऽतिचपले, द्रव्ये तथा जीविते ॥16॥
राज्य पुत्र को, धन याचक को, अभय प्राणियों को देकर ।
बड़े-बड़े नृप तप कर पाते, शाश्वत सुख का गृह शिवपद॥
अत: मोक्ष का पहला कारण, दान यही निश्चित करके ।
धन-जीवन-चञ्चल लख बुधजन, शक्ति प्रमाण दान दे॥
अन्वयार्थ : भूतकाल में भी बड़े-बड़े राजा, पुत्र को राज्य देकर, याचकजनों को धन देकर और समस्त प्राणियों को अभयदान देकर, अनशनादि उत्तम तपों का आचरण कर, अविनाशी सुख के स्थान मोक्ष को प्राप्त हुए हैं; इसलिए मोक्ष का सबसे प्रथम कारण एक दान ही है अर्थात् दान से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है; अत: विद्वानों को चाहिए कि धन तथा जीवन को जल के बुलबुले के समान अत्यन्त विनाशीक समझ कर, सर्वदा शक्ति के अनुसार उत्तमादि पात्रों को दान देवें ।