
बोधरूपमखिलैरुपाधिभि:, वर्जितं किमपि यत्तदेव न: ।
नाऽन्यदल्पमपि तत्त्वमीदृशं, मोक्षहेतुरिति योगनिश्चय: ॥25॥
सर्व उपाधि-विहीन ज्ञानमय, वही हमारा वस्तु-स्वरूप ।
अन्य न किञ्चित् रूप हमारा, यह निश्चय शिवमार्ग स्वरूप॥
अन्वयार्थ : समस्त प्रकार की राग-द्वेष आदि उपाधियों से रहित, सम्यग्ज्ञानस्वरूप जो कोई वस्तु है, वही हमारी है; किन्तु इससे भिन्न किंचित् भी वस्तु हमारी नहीं है । इस प्रकार जो योग का निश्चय है, वही मोक्ष का कारण है; किन्तु इससे भिन्न योग का निश्चय, मोक्ष का कारण नहीं है ।