+ ध्यान का मार्ग अत्यन्त कठिन, गुरु-उपदेश से ही गम्य -
योगतो हि लभते विबन्धनं, योगतो हि किल मुच्यते नर: ।
योगवर्त्म विषमं गुरोर्गिरा, बोध्यमेतदखिलं मुमुक्षुणा ॥26॥
योग बन्ध का कारण है अरु, योग मुक्ति का कारण है ।
योग-मार्ग है कठिन, मुमुक्षु गुरु-वचनों से प्राप्त करें॥
अन्वयार्थ : ध्यान से ही मनुष्य बन्धन को प्राप्त होता है तथा ध्यान से ही मोक्ष को प्राप्त होता है; इस प्रकार यह ध्यान का मार्ग अत्यन्त कठिन है, अत: जो भव्य जीव, मोक्ष के अभिलाषी हैं, उनको यह समस्त ध्यान का मार्ग, गुरु के उपदेश से समझना चाहिए ।