+ क्रोधादि कषाएँ, आत्मा के धर्म नहीं -
नैवात्मनो विकार:, क्रोधादि: किन्तु कर्मसम्बन्धात् ।
स्फटिकमणेरिव रक्तत्व,-माश्रितात्पुष्पतो रक्तात् ॥25॥
क्रोधादिक हों कर्मोदय से, ये आतम के नहीं विकार ।
लाल फूल केआश्रय से ज्यों,स्फटिकमणि दिखता है लाल॥
अन्वयार्थ : जिस प्रकार लाल फूल के आश्रय से स्फटिक मणि लाल हो जाती है, उसी प्रकार आत्मा में कर्म के सम्बन्ध से क्रोध आदि विकार पैदा हो जाते हैं; किन्तु वे क्रोधादि विकार आत्मा के विकार नहीं हैं ।