
त्याज्या सर्वा चिन्तेति, बुद्धिराविष्करोति तत्तत्त्वम् ।
चन्द्रोदयायते यत्, चैतन्यमहोदधौ झगिति ॥35॥
हेय सभी चिन्ता - ऐसी मति, उत्तम तत्त्व प्रगट करती ।
वह मति शीघ्र चेतनोदधि में, चन्द्रोदय सम आचरती॥
अन्वयार्थ : समस्त प्रकार की चिन्ता त्यागने योग्य है; जिस समय इस प्रकार की बुद्धि होती है, उस समय वह बुद्धि, उस तत्त्व को प्रकट करती है कि जो तत्त्व, चैतन्यरूपी प्रबल समुद्र में शीघ्र ही चन्द्रमा के समान आचरण करता है ।