+ मन को वश में रखने का उपदेश -
चित्तेन कर्मणा त्वं, बद्धो यदि बध्यते त्वया तदत: ।
प्रतिबन्दीकृतमात्मन्, मोचयति त्वां न सन्देह: ॥37॥
मन द्वारा तू बँधा कर्म से, यदि तू बाँध रखे मन को ।
तो बन्दी आत्मन्! तू छूटेगा इसमें सन्देह नहीं॥
अन्वयार्थ : अरे आत्मन्! तू इस मन की कृपा से कर्मों से बँधा हुआ है । यदि तू इस मन को बाँध लेवे अर्थात् मन को वश में कर लेवे तो इसमें किसी प्रकार का सन्देह नहीं कि कर्मों से बँधा हुआ भी तू अवश्य छूट जाएगा ।