
बद्धो मुक्तोऽहमथ, द्वैते सति जायते ननु द्वैतम् ।
मोक्षायेत्युभयमनो,-विकल्परहितो भवति मुक्त: ॥46॥
'मैं हूँ बँधा, मुक्त भी हूँ मैं ' - इस दुविधा में होता द्वैत ।
उभय विकल्पों से विहीन, योगीजन उनको होता मोक्ष॥
अन्वयार्थ : 'मैं बँधा हूँ तथा मैं मुक्त हूँ - इस प्रकार द्वैत के होने पर भी निश्चय से द्वैत होता है और इन दोनों विकल्पों से रहित जीव ही मुक्त होता है ।