+ समस्त नयों के पक्षपातरहित होने पर समयसारस्वरूप शुद्धात्मा की प्राप्ति -
बद्धो वा मुक्तो वा, चिद्रूपो नयविचारविधिरेष: ।
सर्वनयपक्षरहितो, भवति हि साक्षात्समयसार: ॥53॥
'चेतन बँधा हुआ या मुक्त,' अरे! नय से यह करो विचार ।
जो नय-पक्ष रहित होता वह, पाता पूर्ण समय का सार॥
अन्वयार्थ : चैतन्यस्वरूप आत्मा, कर्मों से बँधा हुआ भी है और कर्मों से रहित भी है - यह 'नय-विचार की विधि' है, किन्तु जो मुमुक्षु 'समस्त नयों के पक्ष से रहित' होता है, वही निश्चय से समयसार होता है ।