
निश्चयपञ्चाशत्, पद्मनन्दिनं सूरिमाश्रिभि: कैश्चित् ।
शब्दै: स्वशक्तिसूचित,-वस्तुगुणैर्विरचितेऽयमिति ॥61॥
पद्मनन्दि आचार्य निमित्त, एवं स्व-शक्ति से किया प्रगट ।
वस्तुतत्त्व किञ्चित् शब्दों ने, रचा सुनिश्चय पंचाशत्॥
अन्वयार्थ : श्री पद्मनन्दि आचार्य के आश्रित तथा अपनी शक्ति से प्रकट किया है वस्तु का गुण जिन्होंने - ऐसे अनेक शब्दों द्वारा इस 'निश्चय पञ्चाशत्' की रचना की गई है ।