
यूकाधाम कचा: कपालमजिना,-च्छन्नं मुखं योषितां;
तच्छिद्रे नयने कुचौ पलभरौ, बाहू तते कीकसे ।
तुन्दं मूत्रमलादिसद्म जघनं, प्रस्यन्दिवर्चोगृहं;
पादस्थूणमिदं किमत्र महतां, रागाय सम्भाव्यते ॥15॥
केश जुओं के घर अरु मुख-कपाल चाम से ढके हुए ।
नेत्र छिद्र हैं, भुजा युगल लम्बी हड्डी, कुच माँस भरे॥
पेट मूत्र-मल का घर, जंघाओं के बीच बहे मल-धार ।
खंभे जैसे पैर कौन अंग, सज्जन को प्रिय करो विचार॥
अन्वयार्थ : स्त्रियों के बाल तो जुओं के साथ हैं, मुख तथा कपाल चाम से वेष्टित हैं, दोनों नेत्र उसके छेद हैं, स्तन माँस से भरे हुए हैं, दोनों भुजाएँ विस्तृत हड्डियाँ हैं, स्त्रियों का पेट मूत्र तथा मल का घर है, जाँघें बहती हुई विष्टा का घर है और स्त्रियों के चरण स्थूण के समान हैं; इसलिए न मालूम सज्जनों को स्त्रियों की कौन-सी चीज, राग का कारण बनती है ।