+ जन्माभिषेक के समय मेघों की क्षणभङ्गुरता का कारण -
णाह तुह जम्मण्हाणे, हरिणो मेरुम्मि पणच्चमाणस्स ।
वेल्लिरभुवाहिभग्गा, तह अज्जवि भंगुरा मेहा ॥12॥
नाथ! तव जन्मस्नाने, हरेर्मेरौ प्रनृत्यमानस्य ।
प्रलम्बभुजाभ्यां भग्ना:, तथा अद्यपि भंगुरा मेघा:॥
प्रभो! आपके जन्म-स्नान पर, सुरपति ने जो नृत्य किया ।
लम्बी-लम्बी भुजा फैलने, से क्षणभंगुर मेघ हुआ॥
अन्वयार्थ : हे प्रभो! आपके जन्म-स्नान के समय इन्द्र ने अपनी लम्बी भुजाओं को फैला कर नृत्य किया था, उन लम्बी भुजाओं से जो मेघ भग्न हुए थे, वे मेघ इस समय भी क्षणभंगुर ही हैं ।