+ ऋषभ भगवान् को ही ब्रह्मा, विष्णु आदि सार्थक नाम -
बंभप्पमुहा सण्णा, सव्वा तुह जे भणंति अण्णस्स ।
ससिजोण्णा खज्जोए, जडेहि जोडिज्जए तेहिं ॥51॥
ब्रह्मप्रमुखा: संज्ञा:, सर्वा: तव ये भणन्ति अन्यस्य ।
शशिज्योत्स्ना खद्योते, जडै: युज्यते तै:॥
ब्रह्मादिक सब नाम, आपके ही जो, औरों के कहते ।
मूढ़ पुरुष वे, चन्द्र-ज्योत्स्ना, को जुगनू जैसा कहते॥
अन्वयार्थ : हे जिनेन्द्र! ब्रह्मा, विष्णु आदि जो संज्ञाएँ सुनने में आती हैं; वे सब आपकी ही हैं अर्थात् आप ही बह्मा हैं, आप ही विष्णु हैं और आप ही बुद्ध हैं । जो मनुष्य, ब्रह्मा विष्णु आदि संज्ञाएँ दूसरों की मानते हैं; वे मूढ़ मनुष्य, चन्द्रमा की चाँदनी की खद्योत (जुगनू) के साथ तुलना करते हैं - ऐसा लगता है ।