+ प्रभु में एक साथ सूक्ष्मता और गुरुता का प्रदर्शन -
सुहमोसि तह ण दीससि, जह पहु परमाणुपेच्छएहिं पि ।
गुरवो तह बोहमए, जह तइ सव्वं पि संमायं ॥54॥
सूक्ष्मोऽसि तथा न दृश्यसे, यथा प्रभृति परमाणुप्रेक्षिभिरपि ।
गरिष्ठस्तथा बोधमये, यथा त्वयि सर्वपि सम्मातम्॥
महा सूक्ष्म हो इतने कि, परमाणुदर्शि नहिं देख सकें ।
ज्ञानस्वरूपी गुरु इतने कि, सकल पदार्थ समाये हैं॥
अन्वयार्थ : हे प्रभो! परमाणुरूप पदार्थ को प्रत्यक्ष देखने वाले भी आपको देख नहीं सकते, अत: आप अत्यन्त सूक्ष्म हो तथा आप इतने गुरु भी हैं कि सम्यग्ज्ञानस्वरूप आप में यह समस्त पदार्थसमूह समाया हुआ है अर्थात् आपका ज्ञान, आकाश से भी अनन्तगुना अधिक है, इसलिए आकाशादि समस्त पदार्थ, आपके ज्ञान में झलक रहे हैं ।