+ प्रभु-दर्शन एवं गाढ़ भक्ति से समस्त सिद्धियों की प्राप्ति -
दिट्ठे तुम्मि जिणवर, भव्वाणं भूरिभत्तिजुत्ताणं ।
सव्वाओ सिद्धीओ, होंति पुरो एक्कलीलाए ॥30॥
दृष्टे त्वयि जिनवर! भव्यानां भूरिभक्तियुक्तानाम् ।
सर्वा: सिद्धयो, भवन्ति पुर एकलीलया॥
प्रभो! आपके दर्शन से जो, गाढ़ भक्ति से भव्य भरे ।
दर्श मात्र से बात-बात में, उनको सिद्धि सर्व मिलें॥
अन्वयार्थ : हे प्रभो! आपके दर्शन से अत्यन्त गाढ़ भक्तिवाले भव्य जीवों को शीघ्र ही समस्त प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त हो जाती हैं ।