+ हे माता! आपके कृपा से ही मोक्ष की प्राप्ति -
तदस्तु तावत्कवितादिकं नृणां, तव प्रभावात्कृतलोकविस्मयम् ।
भवेत्तदप्याशु पदं यदीक्षते, तपोभिरुग्रैमुर्निभिर्महात्मभि: ॥7॥
जग-विस्मयकर कवितादिक गुण, तव प्रसाद से मनुज लहें ।
जिस पद को तप से मुनि चाहें, वह भी माता सहज मिले॥
अन्वयार्थ : हे माता! इस लोक में मनुष्यों को, कवित्वादि अनेक गुण आपकी कृपा से प्राप्त होते हैं, इसमें कोई आश्चर्य नहीं; किन्तु जिस पद को बड़े-बड़े मुनिराज, कठिन तप करके प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं, वह पद भी आपकी कृपा से सहज प्राप्त हो जाता है ।