
स सर्ववित्पश्यति वेत्ति चाखिलं,
न वा भवत्या रहितोऽपि बुध्यते ।
तदत्र तस्यापि जगत्त्रयप्रभो:,
त्वमेव देवि! प्रतिपत्तिकारणम् ॥9॥
बिना तुम्हारे सकल जगत् को, केवलि नहिं देखें जानें ।
अत: आप ही त्रिभुवनपति के, पूर्णज्ञान में कारण हैं॥
अन्वयार्थ : हे माता! संसार में केवली भगवान समस्त पदार्थों को भलीभाँति देखते-जानते हैं, वह सब आपकी ही कृपा है । आपकी कृपा के बिना उनका जानना-देखना कुछ भी सम्भव नहीं; इसलिए हे माता! तीन जगत् के प्रभु केवली के ज्ञान-दर्शन में आप ही कारण हैं ।